दीवार खुली हो तब वायरिंग सुधारना सबसे सस्ता है, और बाद में सबसे महँगा। लोड का सही हिसाब, पॉइंट कहाँ-कहाँ चाहिए, और वे कटौतियाँ जो तीन गर्मियों बाद भारी पड़ती हैं।
सासाराम और बिक्रमगंज में रीवायरिंग की जो कॉल हमें मिलती हैं, उनमें ज़्यादातर वायरिंग खराब नहीं हुई होती। वह वायरिंग पंद्रह साल पुराने घर के हिसाब से की गई थी, और उसके बाद परिवार ने दो एसी, गीज़र, सबमर्सिबल पंप, इन्वर्टर और रसोई भर के उपकरण उसी पर जोड़ दिए।
वायरिंग घर का वह हिस्सा है जिसे दीवार खुली रहते सही कराना सस्ता है और बाद में बदलना बहुत महँगा। इसलिए काम शुरू होने से पहले एक दोपहर ठीक से सोच लेना फायदे का सौदा है।
लोड का ईमानदार हिसाब
सवाल यह नहीं कि आज क्या चलता है। सवाल यह है कि दस साल बाद इस घर में क्या-क्या चलेगा।
नक्शा सामने रखकर कमरे-दर-कमरे वह सूची बनाएँ जो आगे चलकर लगेगी — अनुभव कहता है कि उसमें योजना के समय बताए गए से ज़्यादा एसी, एक गीज़र, पंप, वॉशिंग मशीन, फ्रिज, माइक्रोवेव और कभी-न-कभी इन्वर्टर शामिल होंगे। सिर्फ़ आज की सूची पर बनी वायरिंग आगे दोबारा करानी पड़ती है।
इसके बाद इलेक्ट्रीशियन उस सूची से लोड और सर्किट का खाका बनाता है। यहाँ हम कोई आंकड़ा नहीं देंगे, क्योंकि सही नाप आपके उपकरणों, दूरी और कनेक्शन पर निर्भर करता है — "तीन कमरे के घर" के लिए एक ही नंबर बताने वाला अंदाज़ा लगा रहा है।
इन तीन पर कंजूसी नहीं: घर तक आने वाली केबल, अर्थिंग और डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड। बाकी सब कुछ इन्हीं पर टिका है, ये एक बार दबकर या जमकर बैठ जाते हैं, और बाद में बदलने का मतलब बनी-बनाई दीवार तोड़ना है। बचत करनी है तो स्विच प्लेट और फिटिंग पर करें, इन पर नहीं।
अलग-अलग सर्किट क्यों ज़रूरी हैं
अच्छी और घटिया वायरिंग का सबसे बड़ा फ़र्क यही है कि घर कितने सर्किट में बँटा है। सस्ता काम पूरी मंज़िल को एक-दो सर्किट पर चला देता है। सही योजना में:
- हर एसी, गीज़र और पंप का अपना अलग सर्किट होता है।
- लाइट और सॉकेट अलग रहते हैं, ताकि सॉकेट की खराबी से घर अँधेरा न हो।
- रसोई का अपना सर्किट होता है, क्योंकि आज सबसे ज़्यादा उपकरण वहीं हैं।
- इन्वर्टर पर चलने वाली लाइन अलग और साफ़ पहचानी हुई होती है।
- बाहर के पॉइंट, पंप और बोरवेल घर के अंदर के सर्किट से अलग रहते हैं।
फ़ायदा व्यावहारिक है। खराबी आने पर सिर्फ़ उतना हिस्सा बंद होता है और दिक्कत मिनटों में पकड़ में आती है। बिहार की लंबी गर्मी के कट में ऐसे घर में ज़रूरी चीज़ें इन्वर्टर पर आराम से चलती हैं।
पॉइंट कहाँ-कहाँ सच में चाहिए
पूरे परिवार की दिनचर्या सोचकर घर में घूमें और पॉइंट तय करें। जो पॉइंट छूट जाते हैं, वे अक्सर यही होते हैं:
- पलंग के दोनों तरफ सॉकेट — चार्जर और लैंप के लिए।
- रसोई में काम की ऊँचाई पर सॉकेट, एक जगह नहीं बल्कि पूरे प्लेटफॉर्म पर फैले हुए।
- छत और आँगन में मौसम-रोधी बॉक्स वाला पॉइंट — पंप, छठ और त्योहार की लाइटिंग के लिए।
- सीढ़ी और गलियारे की लाइट दोनों सिरों पर टू-वे स्विच से।
- प्रवेश के पास इन्वर्टर, राउटर और चार्जिंग के लिए पॉइंट।
- दीवार पंखे और रसोई-बाथरूम के एग्ज़ॉस्ट के पॉइंट।
- वॉशिंग मशीन की सही जगह, जहाँ पानी और निकासी पहले से सोची गई हो।
वायरिंग के समय अतिरिक्त पॉइंट लगभग मुफ़्त हैं। फर्श पर घिसटते एक्सटेंशन बोर्ड महँगे पड़ते हैं, खासकर बरसात में जब फर्श गीला रहता है।
तार की मोटाई और पतले तार का नुकसान
हर सर्किट के लिए तार उसी करंट और दूरी के हिसाब से चुना जाता है। पतला तार लोड पड़ते ही गर्म होता है, और साल-दर-साल गर्म रहने वाला तार अपना ही इंसुलेशन जला देता है — और वह दीवार के भीतर कहीं फेल होता है।
दूसरा नुकसान वोल्टेज गिरना है। लंबे रास्ते में पतले तार पर अच्छा-खासा लोड डालें तो दूसरे सिरे पर वोल्टेज बैठ जाता है। मोटर और कंप्रेसर इसे सह नहीं पाते, और हमारे यहाँ गर्मी की शाम में सप्लाई पहले ही कम रहती है।
नाप आपके घर के लिए निकालनी होगी — उस सर्किट का लोड, तार की लंबाई और कैसे बिछाया गया है। इलेक्ट्रीशियन से पूछें कि हर सर्किट के लिए यही तार क्यों, ताकि हर जगह एक ही तार न लग जाए।
डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड और अर्थिंग
घर की सुरक्षा बोर्ड से तय होती है। अच्छे बोर्ड में मेन स्विच, अर्थ लीकेज के लिए ELCB/RCCB, और हर सर्किट के लिए उसके तार के हिसाब का MCB होता है — बार-बार ट्रिप होने पर बड़ा MCB लगा देना गलत है। बोर्ड सूखी, पहुँच वाली जगह पर हो, बच्चों की पहुँच से ऊपर, और हर लाइन पर नाम लिखा हो ताकि कट के समय कोई भी सही स्विच ढूँढ ले।
अर्थिंग भी इसी समय तय होती है — इलेक्ट्रोड कहाँ जाएगा, मिट्टी कैसी है, अर्थ तार किस रास्ते आएगा। फर्श बन जाने के बाद यह सब बदलना आसान नहीं। हर सॉकेट, हर धातु बॉडी वाला उपकरण, पंप और गीज़र इससे जुड़ा होना चाहिए। नम बरसात और कठोर पानी वाले हमारे इलाके में इसे भाग्य पर नहीं छोड़ते।
मीटर और आने वाली सप्लाई का काम लाइसेंसधारी इलेक्ट्रीशियन का ही है, चाहे बाकी घर कोई भी करे।
एसी, गीज़र और इन्वर्टर की वायरिंग
एसी पॉइंट सामान्य सॉकेट नहीं होता। उसे अलग सर्किट, सही प्रोटेक्शन, मज़बूत अर्थ और ऐसी जगह चाहिए जहाँ इनडोर यूनिट सच में लगेगी — यह अभी तय करें, अप्रैल में नहीं। स्टेबलाइज़र रखना हो तो उसकी जगह भी छोड़ें।
गीज़र भी वैसा ही — अलग सर्किट, बाथरूम के बाहर उसका अपना स्विच, और अच्छी अर्थिंग, क्योंकि गीज़र गीले कमरे की दीवार पर पानी भरी धातु की टंकी है।
इन्वर्टर की वायरिंग बाद में जोड़ने के बजाय पहले से सोचें। तय करें कि कट के समय कौन-सी लाइट, पंखे और सॉकेट चलने चाहिए, उन्हें अलग सर्किट पर रखें और बोर्ड से ही इन्वर्टर उन्हें खिलाए। इन्वर्टर से एक तार खींचकर दो-तीन एक्सटेंशन बोर्ड चलाना गंदा भी है और आसानी से ओवरलोड भी हो जाता है।
छुपी वायरिंग या ऊपर से कंड्यूट
छुपी वायरिंग देखने में अच्छी लगती है और नए घरों में लगभग सभी यही चुनते हैं। अगर कंड्यूट ठीक से डाला गया हो, जिसमें बाद में तार खींचा जा सके, तो यह बिल्कुल ठीक है। पर अगर तार सीधे सीमेंट में दबा दिए गए, तो बदलने के लिए दीवार तोड़नी ही पड़ेगी।
ऊपर से कंड्यूट सस्ता, साफ़-साफ़ दिखने वाला और बदलने में आसान है। पुराने घर की आंशिक रीवायरिंग, बाहरी कमरे, और बरसात में सीलने वाली बाहरी दीवारों के लिए यही समझदारी है।
जो भी चुनें, तारों के रास्ते का एक नक्शा बनाकर रख लें। आठ साल बाद शेल्फ के लिए ड्रिल करने वाला आपको याद करेगा।
काम शुरू होने से पहले
पॉइंट की सूची लिखित में तय करें और सामान कौन देगा यह भी। क्या शामिल है और क्या नहीं, यह पूछ लें — हमारे बिजली के काम सेवाएँ पेज पर हैं और दाम रेट लिस्ट पर, GST अलग से, स्पेयर पार्ट्स बताकर असल दाम पर, और हर काम का बिल।
हम सासाराम, बिक्रमगंज, डेहरी-ऑन-सोन, नोखा, मोहनिया और दाउदनगर में वायरिंग और रीवायरिंग का काम लेते हैं; पूरी सूची सेवा क्षेत्र पेज पर है। साइट विज़िट के लिए +91 96315 11974 पर सुबह 8:00 से शाम 6:30 के बीच फोन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कोई तय संख्या नहीं होती, यह कमरे के इस्तेमाल और फर्नीचर की जगह पर निर्भर है। पूरे परिवार का सामान्य दिन सोचकर तय करें कि कहाँ-कहाँ प्लग लगेगा। पलंग के दोनों तरफ सॉकेट, रसोई के प्लेटफॉर्म पर फैले हुए सॉकेट और छत पर मौसम-रोधी पॉइंट — यही सबसे ज़्यादा छूटते हैं।
नए घर में देखने में बेहतर है, बशर्ते कंड्यूट ऐसा डाला जाए कि बाद में तार खींचकर बदला जा सके। सीधे सीमेंट में दबे तार बिना दीवार तोड़े नहीं बदलते। ऊपर से कंड्यूट सस्ता और बदलने में आसान है, इसलिए आंशिक रीवायरिंग, बाहरी कमरों और सीलन वाली बाहरी दीवारों पर वही ठीक रहता है।
हाँ। भारी और स्थायी लोड के लिए अपना अलग सर्किट, अपनी प्रोटेक्शन और मज़बूत अर्थ चाहिए, जो उसी उपकरण और तार की लंबाई के हिसाब से नापा गया हो। एसी या गीज़र को आम सॉकेट के साथ जोड़ने पर सर्किट ओवरलोड होता है, बार-बार ट्रिप होता है, और कुछ गर्मियों बाद सॉकेट या स्विच जलने लगता है।
आमतौर पर हाँ, पर कितनी साफ़ तरह से — यह मौजूदा वायरिंग पर निर्भर है। अगर बोर्ड पर लाइट और सॉकेट पहले से अलग सर्किट में बँटे हैं, तो चुनी हुई लाइनें इन्वर्टर से आसानी से जोड़ी जा सकती हैं। अगर सब कुछ एक-दो सर्किट पर है तो कुछ रीवायरिंग करनी पड़ेगी। कोई भी दाम बताने से पहले इलेक्ट्रीशियन का बोर्ड देखना ज़रूरी है।
इसमें मदद चाहिए?
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