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बिहार की गर्मी में फ्रिज को लंबा चलाने वाली देखभाल

हम जितने फ्रिज बदलते देखते हैं, उनमें से ज़्यादातर उम्र से नहीं मरे। वे दीवार से सटे, गलत सेटिंग पर, जाम ड्रेन और बिना स्टेबलाइज़र के चलते रहे। इससे बचने की आदतें यहाँ हैं।

फ्रिज घर का इकलौता सामान है जो कभी बंद नहीं होता — मई की 40 डिग्री वाली दोपहरों में, बरसात की सीलन में और हर उस शाम में जब वोल्टेज गिरता है। जिस दिन वह रुकता है, उससे पहले कोई उसके बारे में नहीं सोचता।

नीचे दी गई आदतें मुश्किल नहीं हैं और इनमें कोई खर्च नहीं है। दस साल चुपचाप चलने वाले फ्रिज और दूसरा कंप्रेसर झेल रहे फ्रिज में फ़र्क यही डालती हैं।

साँस लेने की जगह दें

रसोइयों में यह सबसे आम गलती है। फ्रिज पीछे की कॉइल और बगल से गर्मी बाहर फेंकता है। दीवार से सटा, अलमारी के बीच फँसा या ऊपर सामान लदा हो तो वह ऐसा नहीं कर पाता।

  • पीछे और ऊपर लगभग एक हाथ की जगह छोड़ें।
  • बगल में तंग अलमारी न हो।
  • ऊपर कुछ न रखें — बोरी, माइक्रोवेव या पुराने बिस्तर नहीं।
  • गैस चूल्हे से दूर रखें और दोपहर की सीधी धूप से बचाएँ।

साल में दो बार पीछे की कॉइल साफ़ करें

पीछे की काली जाली कंडेंसर है। धूल की परत जम जाए तो वह गर्मी बाहर नहीं फेंक पाता और फ्रिज धीरे-धीरे पिछड़ने लगता है।

यहाँ धूल भारी है — कुदरा, मोहनिया और सासाराम में जीटी रोड के किनारे रहने वाले जानते हैं। फ्रिज बाहर खींचें, प्लग निकालें, कॉइल और कंप्रेसर वाला हिस्सा झाड़ें, और नीचे का फर्श पोंछ लें। एक बार गर्मी से पहले फरवरी-मार्च में, और एक बार छठ-दिवाली की सफाई के साथ।

थर्मोस्टेट की सही सेटिंग

डायल "जितना ठंडा उतना अच्छा" वाला बटन नहीं है। बहुत कम पर रखें तो गर्म रसोई में खाना सुरक्षित नहीं रहता; साल भर पूरा घुमाकर रखें तो फ्रिज लगातार चलता है और बर्फ जमाता है।

  • अप्रैल से जून, जब दोपहर 40 डिग्री पार करती है, ठंडी तरफ़ बढ़ाएँ।
  • बरसात में बीच की सेटिंग ठीक रहती है, पर अंदर जमती नमी पर नज़र रखें।
  • जाड़े में वापस बीच या नीचे ले आएँ।

बर्फ मोटी होने से पहले डीफ्रॉस्ट करें

फ्रीजर प्लेट पर जमी बर्फ परत की तरह काम करती है। उँगली से मोटी हो जाए तो नीचे की ठंडक साफ़ घट जाती है। सही तरीका — सॉकेट से बंद करें, फ्रीजर खाली करें, दोनों दरवाज़े खुले छोड़ें और बर्फ अपने आप पिघलने दें। चालू करने से पहले अंदर पोंछकर सुखा लें।

यह कभी न करें: फ्रीजर प्लेट से बर्फ चाकू, पेचकस या किसी धातु से न खुरचें। उसी प्लेट के अंदर गैस की पाइप चलती है, और एक छेद मुफ़्त की दोपहर को सीलबंद सिस्टम की रिपेयर में बदल देता है, जो पुराने फ्रिज में अक्सर कराने लायक भी नहीं होती।

ड्रेन का छेद और बदबू की जड़

ड्रेन खुला रखें

अंदर, नीचे वाले हिस्से की पिछली दीवार पर एक छोटा छेद होता है। नमी का पानी उसी से होकर कंप्रेसर के ऊपर रखी ट्रे में जाता है और भाप बन जाता है।

यह छेद खाने के कणों से जाम होता है, और रोहतास-कैमूर के जिन हिस्सों में भूजल कड़ा है, वहाँ खनिज की परत से भी। जाम होते ही पानी अंदर जमा होता है और कुछ दिनों में बदबू आने लगती है। इसे रुई की बड्स से धीरे से खोलें, धातु ज़ोर लगाकर न डालें।

बदबू

बदबू की वजह लगभग हमेशा तीन में से एक होती है — पीछे पड़ी कोई भूली हुई खराब चीज़, जाम ड्रेन में रुका बासी पानी, या खुला रखा तेज़ गंध वाला खाना। इसी क्रम से ठीक करें। अच्छी सफाई के बाद भी बदबू रहे तो कहीं पानी रुका है जो अभी मिला नहीं।

बिजली कटौती और वोल्टेज

हमारे इलाके में फ्रिज असल में यहीं खराब होते हैं। बिजली जाए तो दरवाज़ा बंद रखें। भरा फ्रिज बिना खोले कई घंटे ठंडक रोके रखता है। लौटने पर कंप्रेसर सिस्टम में बचे प्रेशर के खिलाफ़ चालू होने की कोशिश करता है और भारी करंट खींचता है — और लौटती सप्लाई भी कम वोल्टेज की हो तो और ज़्यादा।

  • सही रेटिंग का स्टेबलाइज़र, ऐसी जगह जहाँ हवा मिले। वह फ्रिज तक पहुँचने वाले वोल्टेज को काम लायक दायरे में रखता है।
  • अपना अलग वॉल पॉइंट, साझा एक्सटेंशन बोर्ड नहीं, और उस पॉइंट पर ठीक अर्थिंग।
  • सप्लाई बार-बार आ-जा रही हो तो फ्रिज सॉकेट से बंद कर दें और ठहरने पर चालू करें।

सामान समझदारी से रखें

  • गरम खाना कमरे के तापमान पर आने दें, फिर अंदर रखें।
  • सामान के बीच जगह छोड़ें ताकि हवा घूमे।
  • ऊपरी खानों के पीछे बने वेंट पर लंबे डिब्बे न रखें।
  • दरवाज़े के खानों में भारी बोतलें ज़्यादा न भरें — सालों में दरवाज़ा टेढ़ा हो जाता है और सील मिलनी बंद हो जाती है।

कब बुलाएँ

नई खड़खड़ाहट या तेज़ गूँज सुनाई दे, कंप्रेसर टिक करे पर चालू न हो, बॉडी बाहर से गरम लगे, फर्श पर पानी आए, या जलने की गंध आए — तो कॉल करें। इनमें से कोई भी अपने आप ठीक नहीं होता।

दाम रेट लिस्ट पर हैं, GST अलग और पुर्ज़े बताकर असल कीमत पर। हम सोमवार से रविवार, सुबह 8:00 से शाम 6:30 तक +91 96315 11974 पर उपलब्ध हैं, या संपर्क पेज से बुक करें। सारे काम सेवाएँ पेज पर हैं।

हम सासाराम, बिक्रमगंज, मोहनिया, कुदरा और दाउदनगर समेत कई कस्बों में काम करते हैं — पूरी सूची सेवा क्षेत्र पेज पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अप्रैल से जून तक, जब यहाँ दोपहर 40 डिग्री पार करती है और रसोई खुद गरम रहती है, डायल ठंडी तरफ़ बढ़ाएँ। जाड़े में वापस बीच की ओर ले आएँ, वरना फ्रिज लगातार चलता है और बर्फ जमाता है। साल में दो बार, पीछे की कॉइल साफ़ करते समय बदल लेना याद रखने का आसान तरीका है।

पीछे और ऊपर लगभग एक हाथ की जगह, और बगल में तंग अलमारी न हो। पीछे लगी कॉइल को गर्मी हवा में छोड़नी होती है, और दीवार से सटा या चारों ओर से घिरा फ्रिज कंप्रेसर को ज़रूरत से कहीं ज़्यादा देर चलाता है। ऊपर कुछ भी रखा न रहने दें।

आमतौर पर इसलिए कि कहीं पानी रुका है जो मिला नहीं। नीचे वाले हिस्से की पिछली दीवार का छोटा ड्रेन छेद खाने के कणों और कड़े पानी की परत से जाम हो जाता है, और बासी पानी सब्ज़ी की ट्रे के नीचे जमा होता रहता है। उस छेद को रुई की बड्स से धीरे से खोलें और तेज़ गंध वाला खाना ढककर रखें।

थोड़ी देर की कटौती में दरवाज़ा बंद रखें और छेड़ें नहीं — भरा फ्रिज बिना खोले कई घंटे ठंडक रोके रखता है। अगर सप्लाई बार-बार आ-जा रही हो या बहुत कम वोल्टेज पर लौट रही हो, तो सॉकेट से बंद कर दें और सप्लाई ठहरने पर चालू करें। बाकी समय अलग पॉइंट पर लगा सही स्टेबलाइज़र उसकी रक्षा करता है।

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