मच्छर, तिलचट्टे, दीमक, चूहे और चींटियाँ — जून के अंत से सब बढ़ जाते हैं। क्या सच में काम आता है, किस पर पैसा बर्बाद होता है, और पेशेवर ट्रीटमेंट से पहले क्या तैयारी करें।
जून के आखिरी हफ्ते से सितंबर के अंत तक रोहतास का लगभग हर घर एक ही लड़ाई लड़ता है। बारिश से पानी जमता है, दीवारों और फर्नीचर में सीलन आती है, अनाज में नमी रहती है — और जो कीड़े गर्मी भर चुपचाप थे, उन्हें अचानक सब कुछ मिल जाता है।
ज़्यादातर घरों की प्रतिक्रिया होती है सामान खरीदना — स्प्रे, कॉइल, चॉक, जेल, ट्रैप। इनमें से कुछ काम आता है। बाकी लक्षण पर खर्च होता है जबकि असली वजह तीन फुट दूर जस की तस रहती है।
वह बात जो सब तय करती है
कीड़े तीन चीज़ों के लिए आते हैं — पानी, खाना और छिपने की जगह। इनमें से कोई एक भी हटा दें तो संख्या अपने आप गिरती है। तीनों बनी रहें तो कोई स्प्रे ज़्यादा दिन नहीं टिकता, क्योंकि आप मौजूद कीड़े मार रहे होते हैं और हालात नए पैदा करते रहते हैं।
इसीलिए कीट नियंत्रण का पहला घंटा स्प्रे में नहीं, घर और अहाता घूमकर देखने में लगना चाहिए।
मच्छर और जमा पानी
मच्छर लगभग पूरी तरह पानी की समस्या है, और वह पानी आमतौर पर घर से कुछ ही मीटर दूर होता है।
- गमलों के नीचे की तश्तरियाँ, जो हर बारिश में फिर भर जाती हैं
- पुराने टायर, टूटी बाल्टी, फेंके हुए डिब्बे और निर्माण का मलबा
- बंद कर दिया गया कूलर जिसका पानी नहीं निकाला
- जाम छत की निकासी और छत का वह हिस्सा जहाँ पानी ठहरता है
- बिना ढक्कन की टंकी और खुले ड्रम
- चहारदीवारी और बगल के प्लॉट के बीच की जगह
हफ्ते में एक बार इन्हें खाली करके सुखा देना किसी भी स्प्रे से ज़्यादा असर करता है, क्योंकि अंडे से मच्छर बनने का चक्र इतना छोटा होता है कि साप्ताहिक सफाई उसे तोड़ देती है। इसके आगे खिड़कियों पर जाली और बिस्तर पर मच्छरदानी — यही दो चीज़ें अंदर काटने वाले मच्छरों को भरोसे से घटाती हैं।
अहाते में फॉगिंग देखने में असरदार लगती है और उस समय उड़ रहे मच्छर मार देती है। लार्वा पर कोई असर नहीं होता। अगर पानी वहीं है तो कुछ ही दिन में संख्या वापस आ जाती है।
तिलचट्टे और नालियाँ
तिलचट्टे नाली और नमी की समस्या हैं। वे फर्श की नाली, पाइप के आसपास की दरारों और रसोई के प्लेटफॉर्म के पीछे-नीचे से आते हैं, और टिके इसलिए रहते हैं क्योंकि वहाँ पानी और खाने का अवशेष मिलता है।
क्या काम आता है
- फर्श की नाली को इस्तेमाल न होने पर ढककर रखना, और जहाँ खुला छेद है वहाँ ट्रैप लगवाना
- जहाँ वेस्ट पाइप दीवार या फर्श से निकलता है, वह जगह बंद करना
- फ्रिज, चूल्हे और प्लेटफॉर्म के पीछे-नीचे की सफाई, जहाँ असली चिकनाई और टुकड़े होते हैं
- सिंक रातभर गीला न छोड़ना और बर्तन भिगोकर न रखना
- जेल बेट को खुली सतह पर नहीं, दरारों और कब्ज़ों में लगाना
क्या आमतौर पर नहीं
जब कॉलोनी नाली और कैबिनेट के खोखले हिस्सों में है, तब खुली दीवार के किनारे एरोसोल छिड़कना। जो दिख रहे हैं वे मर जाते हैं, स्रोत वहीं रहता है। फर्श पर खींची चॉक की लकीर की भी यही सीमा है।
सीली दीवारों और फर्नीचर में दीमक
दीमक सबसे महँगी दिक्कत है, क्योंकि जब तक दिखती है तब तक नुकसान काफी हो चुका होता है। हमारे यहाँ वह प्लिंथ से, सीली या उत्तर की दीवार से, और फर्श से सटी लकड़ी से घर में आती है।
बरसात के दौरान और ठीक बाद ये निशान देखें:
- प्लिंथ, दीवार या अलमारी के पीछे चढ़ती मिट्टी की पतली नलियाँ
- दीवार की सतह का हल्का फूलना और ठोकने पर खोखली आवाज़
- चौखट और स्कर्टिंग का नरम लगना या नाखून से दब जाना
- लकड़ी के जोड़ के पास मिट्टी जैसा महीन चूरा
- तेज़ बारिश के बाद थोड़ी देर उड़ते कीड़े, जो खिड़की के पास पंख गिरा देते हैं
सीली दीवार से सटी लकड़ी की अलमारी सबसे आम शुरुआत है। ग्राउंड फ्लोर में सीधे फर्श पर खड़ी अलमारी भी वैसी ही।
यह कभी न करें: दीमक की मिट्टी वाली नली तोड़कर उसमें घर का कीटनाशक न डालें। इससे कॉलोनी दीवार में बिखर जाती है, संक्रमण ढूँढना और ठीक से इलाज करना और मुश्किल हो जाता है, और घोंसला मरता भी नहीं। नली जैसी है वैसी छोड़ दें ताकि टेक्नीशियन उसे उसी जगह देख सके।
दीमक का पेशेवर काम मिट्टी, प्लिंथ और प्रभावित लकड़ी का व्यवस्थित उपचार होता है, स्कर्टिंग पर स्प्रे नहीं। यह सामान्य पेस्ट ट्रीटमेंट से अलग काम है और उसका दाम तथा तरीका अलग से बताया जाना चाहिए। उपचार के प्रकार सेवाओं के पेज पर और दाम रेट लिस्ट पर हैं।
चूहे और चींटियाँ
चूहे तय रास्ते से आते हैं
बाहर के बिल भर जाने पर चूहे घर के भीतर आते हैं। वे एक तय रास्ते से आते हैं, और ध्यान से देखने पर रास्ता दिख जाता है — दरवाज़े के नीचे की जगह, पाइप के चारों ओर का छेद, टूटी रोशनदान की जाली, गायब नाली का ढक्कन, दीवार से सटी झाड़ी।
इन रास्तों को स्टील वूल और सीमेंट से बंद करना किसी भी ट्रैप से ज़्यादा टिकाऊ है, क्योंकि ट्रैप एक चूहा पकड़ता है और बंद छेद सबको रोकता है। अनाज और सूखा सामान बोरी में फर्श पर नहीं, कसकर ढके धातु या मोटे प्लास्टिक के डिब्बों में रखें।
ग्लू बोर्ड खूब बिकते हैं और खरीदकर लोग पछताते हैं — धीमे होते हैं, निपटाना अप्रिय होता है, और उनमें छिपकली और पक्षी भी फँसते हैं।
चींटियाँ तय लकीर पर चलती हैं
चींटियाँ ज़्यादातर परेशानी हैं, खतरा नहीं। वे एक तय रास्ते से किसी खास खाने तक जाती हैं, और उस रास्ते को साबुन वाले पानी से पोंछ देने पर वह रासायनिक निशान मिट जाता है जिसके सहारे वे चलती हैं। खाना ढकना, सिंक के नीचे का धीमा लीक ठीक कराना और मीठा अवशेष साफ करना आमतौर पर काफी है। अगर बड़ी काली चींटी बाहर से नहीं बल्कि सीली खिड़की की चौखट से निकल रही है, तो वह दिखाने लायक बात है।
ट्रीटमेंट से पहले तैयारी
- रसोई का प्लेटफॉर्म खाली करें और नीचे की कैबिनेट खोल दें ताकि कोने और खोखली जगहें पहुँच में आएँ।
- फर्नीचर दीवार से थोड़ा हटा दें।
- खुला खाना, पीने का पानी, बर्तन और पालतू जानवर के बर्तन ढक दें या हटा दें।
- पालतू जानवर, मछली का टैंक और पक्षी उस हिस्से से बाहर करें; एक्वेरियम न हट सके तो ढककर उसका एयर पंप बंद रखें।
- घर में छोटा बच्चा, साँस की तकलीफ वाले बुज़ुर्ग या गर्भवती महिला हों तो टेक्नीशियन को पहले ही बता दें। इससे काम का तरीका और समय बदलता है, और यह बात आने से पहले पता होनी चाहिए, बाद में नहीं।
ट्रीटमेंट के बाद
टेक्नीशियन जितनी देर कहे, उतनी देर उस हिस्से से बाहर रहें, फिर हवा आने-जाने दें और तब लौटें। किनारों और कोनों पर तुरंत पोछा न लगाएँ — अवशेष धो देने का मतलब है इलाज धो देना।
पहले कुछ दिन तिलचट्टे कम नहीं, ज़्यादा दिखेंगे। वे दवा के असर से छिपी जगहों से बाहर निकलते हैं। यह इलाज का काम करना है, नाकाम होना नहीं। फॉलो-अप विज़िट की बात पहली विज़िट से पहले ही तय कर लें ताकि पता रहे कि उसमें क्या शामिल है।
समय और क्षेत्र
बचाव का सबसे अच्छा समय बरसात से ठीक पहले, जून में है। उसके बाद अभी — बरसात के दौरान और तुरंत बाद, जब नमी चरम पर होती है और सर्दी के लिए सब कुछ भीतर आने से पहले।
हम सासाराम, डेहरी-ऑन-सोन, नोखा, कुदरा और भभुआ में पेस्ट कंट्रोल करते हैं; पूरी सूची सेवा क्षेत्र पेज पर है। हर काम का बिल दिया जाता है, और शुरू करने से पहले टेक्नीशियन बताएगा कि क्या इस्तेमाल हो रहा है और क्या सावधानी रखनी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुख्य वजह नमी है। नालियाँ गीली रहती हैं, फर्श का ट्रैप पानी रोके रखता है, और रसोई की कैबिनेट के पीछे तथा प्लेटफॉर्म के नीचे की जगह लगातार सीली रहती है — प्रजनन के लिए यही चाहिए। वे नाली और पाइप के आसपास की दरारों से आते हैं। इन दरारों को बंद करना और सिंक रातभर सूखा रखना स्प्रे से ज़्यादा काम का है।
प्लिंथ, दीवार या अलमारी के पीछे मिट्टी की पतली नलियाँ देखें; दीवार की सतह का फूलना और ठोकने पर खोखली आवाज़; चौखट या स्कर्टिंग का नाखून से दब जाना; और लकड़ी के जोड़ के पास मिट्टी जैसा महीन चूरा। तेज़ बारिश के बाद उड़ते कीड़ों का खिड़की के पास पंख गिराना भी आम निशान है।
हो सकता है, बशर्ते घर तैयार हो और टेक्नीशियन को पहले से बता दिया जाए। छोटा बच्चा, गर्भवती महिला, साँस की तकलीफ वाले बुज़ुर्ग या पालतू जानवर हों तो पहले ही बताएँ, क्योंकि इससे काम का तरीका और समय बदलता है। जानवर और पक्षी बाहर करें, एक्वेरियम ढकें, और जितनी देर कहा जाए उतनी देर उस हिस्से से दूर रहें।
सिर्फ थोड़ी देर के लिए। फॉगिंग उस समय उड़ रहे मच्छर मारती है, जमा पानी के लार्वा पर कोई असर नहीं करती। अगर प्रजनन की जगहें बनी रहें तो कुछ दिन में संख्या लौट आती है। गमलों की तश्तरियाँ, कूलर, टायर, ड्रम और जाम छत की निकासी हफ्ते में एक बार खाली करना ही असल में मच्छर घटाता है।
इसमें मदद चाहिए?
सासाराम, रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद में घर पर टेक्नीशियन बुक करें। दाम पहले से तय, हर काम का बिल।